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आज के ज़माने में बच्चोंकी पढ़ाई वो भी उच्चस्तर पर बहुत ही आवश्यक एवं माँ बाप का चिंता का विषय हो गई है | बच्चा दो बरस का हुआ नहीं कि उसे अच्छेसे अच्छा स्कुल में डालनेकी दौड़ शुरू हो जाती है | हर माबाप कि इच्छा होती है अपना बच्चा सर्वज्ञानी हो, ये भी ठीक है पर बच्चे के उम्र का तो लिहाज होना चाहिए | यह उसके खेलने कि मौजमस्ती कि उम्र है या स्कुल जानेकी,प्ले स्कुल है तो क्या हुआ!है तो स्कुल ही| आगे तो और पुस्ताकोंका बोजा सर पर उठाए बच्चा,आठ आठ घंटे स्कुल में बिता रहा है | स्कुल के बाद ट्यूशन ,फिर स्कुल और ट्यूशन में दिया गया गृहकार्य | माबाप का गृहकार्य अलगसे करना पड़ता है|

ये पढ़ाई का बोज हम कबतक बच्चोंपर डालते रहेंगे | आज हर जगह चर्चा हो रही है कि ये बोजा ब्च्चोंपर न आये इसके लिए हमे क्या कदम उठाने होंगे ?

इसके अलावा हर बच्चा भी गुनपत्रिका में अच्छे से अच्छे अंक प्राप्त करना चाहता है | अगर वो ना प्राप्त कर सका तो उसकी मानसिकता पर परिणाम होजाने कि संभावना होसकती है | देखागाया है कि ऐसे में बच्चोंकी मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है और वह आत्महत्या जैसे भारी कदम भी उठाते है |

ये ना बच्चोंके हित में है ,ना माबाप के, नाही समाजके | ऐसे में हमे हमारे शिक्षा प्रणाली के बारे में फिरसे सोचने कि आवश्कता है और आज इस पर विचार हो भी रहा है | हमारे आदरणीय शिक्षा मंत्री महोदय श्री सीब्बल जी ने शिक्षाप्रणाली में परिवर्तन लाने के लिए पहला कदम उठाया है | परीक्षा प्रणाली में काफीबदलाव किये है | कक्षा आठवी तक कोई बच्चा अनुतिर्ण न हो इसके लिए अभ्यासपूर्वक सूचि तयार कि गई है |

अन्य देशोंकी तरह हमारे देश में भी व्यवसायभिमुख शिक्षा देने कि आवश्यता है क्योंकि आज हर देश में नौकरी कि कमिया महसूस होने लगी है | हर बच्चा आगे जाकर अपने पैरोंपर खड़ा होसकता है | अपना खुदका व्यवसाय शुरू कर सकता है |

हर बच्चा एक हीरे जैसा होताहै ,बस उसपर अच्छी कारीगिरी होनी चहिये| फिर उसे चमकने में देर नही लगेगी | हर बच्चे का अपना एक हुनर होताहै उसे परखनेकी जरुरत है | आज विद्यालय से महाविद्यालय तक हर शाखा ,हर विषय , हर संशोधन विद्यार्थीका पसंददीदा होना चाहिए | तांकि पढाई बोज नही बल्कि आनंददाइ लगे और छोटे से बड़ा विद्यार्थी बिना बोज महसूस किये हसते हसते पढ़े |

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